आई नोट , भाग 41
अध्याय 7
डिसाइड तुम्हें करना है
भाग 5
★★★
शख्स सभी लोगों के हंसते हुए चेहरे को देख रहा था। उन चेहरों को देखकर अंदर ही अंदर उसका अंतर्द्वंद उसे चुनौती दे रहा था। उसने अपनी आंखें बंद कर ली। आंखें बंद करने के बाद उसके माथे पर गहरी लकीर बन गई। यह सब इस बात का संकेत था कि वह अब अपने मन के विचारों को प्रकट करने वाला है। मगर तभी उसने अपनी आंखें खोली और तेजी से सामने आशीष की तरफ जाने लगा। उसने अपने हाथ की उंगलियों को कसकर बंद कर उन्हें मुट्ठी के रूप में बना लिया था।
उसे आगे बढ़ता देख आशीष खामोश हो गया, जबकि बाकी के लोग भी धीरे-धीरे शांत पड़ते गए। शख्स स्टेज पर चढ़ा और एक जोरदार मुक्का आशीष के मुंह पर दे मारा। पूरी पार्टी में हो-हल्ला मच गया। आशीष ने खुद को संभालते हुए पलटवार करने की कोशिश की, जहां उसके एक हाथ में माइक था और वह माइक ही शख्स के सर पर मारने वाला था, मगर जैसे ही आशीष ने हाथ उठाया शख्स ने उसके हाथ को बीच रास्ते में ही पकड़ लिया। हाथ को बीच में पकड़ते ही उसने दोबारा उसके चेहरे पर मुक्का दे मारा। दो मुक्को की मार के बाद आशीष के मुंह से खून निकलने लगा था।
इतने में आशीष के सारे बॉडी गार्ड वहां आ धमके। उन्होंने शख्स को पकड़ा और पीछे की तरफ खींच लिया। मानवी मुंह पर हाथ रख वहीं खड़ी थी जहां वह पहले खड़ी थी। उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था क्या करना चाहिए क्या नहीं। ना ही उसका दिमाग इस बात पर चल रहा था कि आखिर उसके सामने हो क्या रहा है। वह जल्दी से आगे बढ़ी और जाकर अपने पति को संभाला।
सभी बॉडीगार्ड शख्स को पार्क की ओर ले जाने लगे थे। शख्स अपनी हर संभव कोशिश कर उनके चंगुल से छूटने की कोशिश कर रहा था, मगर 4 हटे कटे बॉडीगार्ड के सामने उसके बस नहीं चलने वाली थी। कुछ दूर जाकर बॉडीगार्ड ने उन्हें अपने आप छोड़ दिया जहां मानवी उसके पास चली गई।
“यह आप क्या कर रहे हैं...” मानवी उसके गालों को थपथपाते हुए उसे शांत कर रही थी
शख्स ने-अपने कोट को ठीक किया और बोला “बस किसी को दिखा रहा था लेखक क्या कर सकता है, अब देखना इसे इसकी औकात मैं बताऊंगा।”
“नहीं आप ऐसा कुछ भी नहीं करोगे...” मानवी बोली।
इतने में आशीष भी वहां आ गया। उसके दो बॉडीगार्ड उसे आगे बढ़ने से रोक रहे थे ताकी लड़ाई ना हो। वहीं दो बॉडीगार्ड शख्स की तरफ खड़े थे।
आशीष ने वहां शख्स से कहा “निकल जाओ मेरी पार्टी से, तुम जैसे बदतमीज लोगों के लिए मेरी पार्टी में कोई जगह नहीं है।” इतना कहकर उसने अपने बॉडीगार्डो की तरफ देखा जिन्होंने हां में सिर हिलाया। हां में सर हिलाने के बाद वो शख्स की तरफ चल पड़े थे।
बॉडीगार्डो ने शख्स को पकड़ने की कोशिश की तो शख्स ने उनसे अपना हाथ छुड़ा लिया। हाथ छुड़ाने के बाद उसने कहा “रिस्पेक्ट सिर्फ उन्हीं को दी जाती है जो रिस्पेक्ट के लायक हो... हवा में उड़ने वालों को तो ऐसे ही जमीन पर लाकर पटका जाता है।”
“तुम जानते नहीं मैं कौन हूं... ” आशीष इतना ही बोला था कि शख्स ने उसे बीच में टोकते हुए कहा
“और तुम नहीं जानते मैं कौन हूं..... मैं इतनी अच्छी किसी से दोस्ती नहीं निभाता जितनी अच्छी किसी से दुश्मनी निभाता हूं।”
इतने में बॉडीगार्ड फिर से आगे हुए ताकी शख्स को बाहर लेकर जा सके। मगर शख्स ने दोबारा हाथ छुड़ाया और मानवी को कहा “मैं यहां से जा रहा हूं, तुमको आना हो तो आ जाना, वरना मैं घर पर तुम्हारा इंतजार करूंगा।” उसने दोबारा अपना कोट सही किया और वहां पार्टी से चला गया।
मानवी ने एक बार आशीष की तरफ देखा एक बार अपने पति की तरफ। वह इस बात का फैसला नहीं कर पा रही थी कि अब उसे यहां क्या करना है। आखिरकार उसने अपने पति की तरफ जाने का फैसला लिया। वह अपने पति की तरफ जाने के लिए मुड़ी मगर तभी आशीष ने उसे पकड़ लिया। इसी बीच शख्स ने पीछे मुड़कर नहीं देखा क्या हो रहा है क्या नहीं। उसे बस पार्टी से निकलना था।
आशीष ने मानवी को खींचकर अपनी और कर लिया जहां वो उसके सीने से जा लगी। सीने से लगते ही आशीष ने उसे अपने दोनों हाथों से पकड़ लिया। आशीष की बाहों में जाते ही मानवी का हौसला पस्त पड़ने लगा। वह उसकी बाहों से छूटने की कोशिश तो कर रही थी मगर इस तरह से कि उसकी कोशिश में किसी भी तरह का दम नहीं था।
उसके जाने के बाद आशीष मानवी के साथ बिअर टेबल की ओर गया और वहां ड्रिंक उठाकर उसे ऊपर करते हुए जोर से बोला “एंजॉय द पार्टी..” सारे लोग अपने पहले वाले कामों में खो गए। आशीष ने मानवी से कहा “और तुम मेरे साथ चलो....” उसने मानवी का हाथ खींचा और रिजॉर्ट के अंदर की ओर ले जाने लगा।
रिजॉर्ट के अंदर जैसे ही दोनों कम रोशनी वाले कमरे में पहुंचे वहां मानवी ने उसके हाथ को झटका दिया और खुद को छुड़ाते हुए उससे अलग हो गई।
उससे अलग होने के बाद उसने कहा “आखिर यह सब क्या है आशीष, तुम, यह सब कैसे कर सकते हो, तुमने उनकी इंसल्ट की है वह भी एक पूरी भरी पार्टी में।”
“कैसी बातें कर रही हो तुम मानवी..” मानवी के बोलने का अंदाज उसके पति की हमदर्दी को प्रकट कर रहा था, जबकि आशीष ने बिल्कुल शांत फिलॉसफी देने वाले नजरिए से कहा “मैंने तुम्हारे पति कि कहीं से भी इंसल्ट नहीं की है। मैंने बस सच्चाई को लोगों के सामने रखा। वह सच्चाई जो असल में सच्चाई है। देखा, जब लोगों ने उस सच्चाई को जाना तो वह कैसे तुम्हारे पति पर हंसने लगे। क्योंकि उन्हें पता है यह एक ऐसी सच्चाई है जो हंसने के ही लायक है। इसीलिए मैं तुमसे बार-बार कहता आ रहा था कि तुम उसके लिए नहीं बनी हो। वह तुम्हें डिजर्व नहीं करता।”
“मगर मैंने उनसे शादी की है।” मानवी रुंआसे गले से चिल्लाते हुए बोली।
“एक ऐसी शादी जो तुम्हें मजबूरी में करनी पड़ी। तुम्हारे मां-बाप मर गए थे और तुम्हारे पास कोई सहारा नहीं था”
“लेकिन हम दोनों में प्यार है।”
“ऐसा प्यार जिसमें तुम्हारा पति तुम्हें 3 साल तक घर में कैद करके रखता है, तुम्हें बाहरी दुनिया से दूर रखता है।”
“लेकिन...” मानवी रो पड़ी।
आशीष उसके करीब आने लगा “लेकिन कुछ भी नहीं मानवी, तुम जानती हो सच्चाई क्या है, तुम जानती हो तुम्हारे पति ने बस तुम्हें एक दिमागी कैदी बनाया है। एक ऐसा दिमागी कैदी जो सिर्फ और सिर्फ एक घर में रहकर उसकी दुनिया का हिस्सा बना रहे। एक ऐसा दिमागी कैदी जिसके लिए वह नहीं चाहता उसे वह मिले जो उसे चाहिए। एक ऐसा दिमागी कैदी जिसकी फिलिंग को उसने पूरी तरह से खत्म कर दिया था। मानवी यह सच्चाई है और अब तुम्हें भी इसे स्वीकार करना होगा।”
“मगर मैं यह नहीं कर पाऊंगी....” मानवी सुबकती हुई बोली
“जिंदगी को बदल देने वाले निर्णय तकलीफ दायक होते हैं, मगर तकलीफ दायक निर्णय लेकर ही जिंदगी में आगे बढ़ा जा सकता है।”
“मगर आशीष....” इससे पहले वह कुछ और बोलती आशीष उसके बिल्कुल करीब आया और उसे गले से लगा लिया।
गले से लगाने के बाद आशीष ने कहा “बस मानवी बस। अब तुम्हारा बुरा दौर खत्म हो चुका है। आज से तुम्हारी जिंदगी की नई शुरुआत होगी। एक ऐसी शुरुआत जिसमें तुम्हें सारी खुशियां मिलेगी। जिसमें तुम्हें वह सब मिलेगा जो तुम चाहती हो।”
आशीष ने उसके बालों और उसकी कमर पर हाथ फेरा। इससे मानवी को सुकून सा मिला और वह उसकी बाहों में ढेर होती गई। उसे नहीं समझ आ रहा था वह अब आगे क्या बोले क्या नहीं। वहीं आशीष की बातें और उसके कहने का अंदाज इतना परफेक्ट था कि उसने मानवी को पूरी तरह से मना लिया था।
आशीष बोला “मानवी, देखना मैं तुम्हें दुनिया की हर खुशी दूंगा। मैं तुम्हारी फीलिंग को हमेशा जिंदा रखुगां”
वह लोग जिस कमरे में थे वहां दफ्तर में काम करने वाला बड़ा टेबल भी पड़ा था। आशीष ने मानवी को गले से हटाया और उसे धीरे से चूमने की कोशिश की, मगर तभी अचानक मानवी ने आशीष को धक्का मारा और उसे दूर पटक दिया।
“नहीं...” मानवी बोली “मेरा पति चाहे जैसा भी हो वह मेरा पति है, और मैं अपने पति को कभी नहीं छोडूंगी।”
आशीष दूर नीचे फर्श पर गिरा हुआ था। यह सुनते ही उसके चेहरे पर गुस्से वाली लकीरे आ गई।
मानवी ने आगे कहा “और मैं कल ही तुम्हारी नौकरी छोड़ रही हूं। मुझे कुछ भी नहीं चाहिए। ना तुम्हारा गेस्ट हाउस, ना तुम्हारी कंपनी के दो पर्सेंट शेयर। मेरे सारे फसाद की जड़ तुम हो। तुम्हारी वजह से ही यह सब हुआ। मगर अब यह और नहीं होगा।”
मानवी कमरे से जाने लगी, मगर तभी आशीष एकदम से उठा और उसने मानवी को पकड़ कर उसे खींचते हुए टेबल की ओर कर लिया। वहां उसने मानवी को बालों से पकड़ा और उसे जबरदस्ती टेबल पर पटक दिया। ( जोर से नहीं, जबरदस्ती से) टेबल पर पटकने के बाद वह गुस्से में बोला “तुम ऐसा कुछ भी नहीं करोगी मानवी, अगर तुमने ऐसा कुछ भी किया तो मैं तुम्हारे पति को बता दूंगा हम दोनों के बीच क्या हुआ, और अगर यह बात तुम्हारे पति को पता चली तो ना तुम्हारा प्यार रहेगा ना तुम्हारा पति। वह तुमसे नफरत करने लगेगा, इतनी नफरत जिसकी तुम कल्पना भी नहीं कर सकती।”
मानवी सुबककर रोने लगी। “क्यों आशीष, तुम, तुम मेरे साथ ऐसा क्यों कर रहे हो...”
आशीष ने किसी पागल सनकी की तरह अपना मुंह उसके पास किया और मानवी के कानों को चूमता हुआ बोला “तुम नहीं समझ सकती मानवी, नहीं समझ सकती, तुम्हें देखने के बाद मुझ पर क्या बितती है, यह सिर्फ मैं जानता हूं।”
इसके बाद उसने मानवी को खड़ा कर अपनी ओर घुमाया और जबरदस्ती उसे चूमने लगा। मानवी ने इसका विरोध किया मगर आशीष की धमकी और उसकी ताकत के आगे उसका विरोध फिका था। मानवी अपने होंठ और आखें कसकर बंद कर चुकी थी मगर इसके बावजूद आशीष उसे चूमता रहा। मानवी रो रही थी। वो भी पछतावे के आंसू।
आशीष ने अपने दोनों हाथ मानवी के कंधों पर रखे और उसे जोर से पीछे की ओर धक्का मारकर टेबल पर लेटा दिया। फिर खुद उसके ऊपर हुआ और अपना शरीर उसके शरीर पर सटाता हुआ उसके दोनों हाथों को अपने हाथों में ले उन्हें वाई आकार में फैला दिया।
“मानवी” आशीष बोला “अब से तुम बस उसी हिसाब से चलोगी जिस हिसाब से मैं तुम्हें चलने के लिए कहूंगा। इसके बदले मैं तुम्हारी सच्चाई कभी तुम्हारे पति को नहीं बताऊंगा।”
इतना कहकर उसने दोबारा मानवी को चूमा। फिर पीछे हुआ और अपनी शरिर को उसके शरिर से हटाते हुए अपने दोनों हाथों की उंगलीयों को मानवी के चेहरे पर फेरना शुरू कर दिया। इससे मानवी का सुबकना और ज्यादा बढ़ गया। फिर उसने दोनों हाथों की एक एक उंगली को चुना और वो उंगलीयां पहले मानवी के माथे पर आई, फिर नीचे होते हुए आंखों पर, इसके बाद गालों पर, गालों के बाद होठों पर, वहां वह कुछ देर रुका, होठों पर दोनों ही उंगलियों को घुमाया, फिर उंगलियां नीचे ठोढ़ी पर आई, फिर गर्दन पर, और गर्दन से होते हुए उसके कंधों की ओर जाने लगी। वहां मानवी की ड्रेस के फिते थे। आशीष ने दोनों ही उंगलियों को उन फितो में फंसाया और फिर बाहर की ओर झटका दिया। एक ही झटके में मानवी की ड्रेस के फिते खुलते गए।
फिते खोलने के बाद आशीष ने ड्रेस को खींचा और नीचे की तरफ सरका दिया। इसके बाद वह दोबारा आगे की और झुका। जब आशीष दुबारा मानवी के ऊपर आ गया तब मानवी सुबकते हुए बोली “आशीष, तुम बुरे हो.....”
आशीष मुस्कुराया और मानवी के के चेहरे के पास आते हुए कहा“हां, हां, मैं बुरा हूं, लेकिन कितना, यह तुम नहीं जानती, और ना ही कभी जानने की कोशिश करना।” उसने अपने मुंह को मानवी के कान की ओर किया और उसे कसकर मुंह में ले लिया। मानवी तेजी से रोने लगी। इससे मानवी को मजा नहीं आ रहा था बल्कि दर्द हो रहा था। उसने हाथों को छुड़ाने की कोशिश की मगर वह पहले से ही आशीष के शिकंजे में थे।
कान को काटने के बाद आशीष उसे गर्दन से काटने लगा। वहां काटने के बाद उसने दोबारा मानवी को चुमा मगर उसके होठों को अपने दांतों में लेते हुए। इसके बाद उसने इसे आगे भी जारी रखा जो प्यार ने होकर एक तरह का पागलपन था।
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